window.dataLayer = window.dataLayer || []; function gtag(){dataLayer.push(arguments);} gtag('js', new Date()); gtag('config', 'UA-152678270-1'); दीपावली निबंध 2021 हिंदी में pdf - 10, 20, 150, 200 words लाइन in sanskrit

दीपावली निबंध 2021 हिंदी में pdf – 10, 20, 150, 200 words लाइन in sanskrit – gujarati

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दीपावली निबंध 2021 हिंदी में pdf

दीपावली दो शब्दों दीप व अवली से मिलकर बना है जिसका अर्थ है – दीपों की पंक्ति। दीपावली भारत का सबसे लोकप्रिय और बड़ा त्यौहार है। यह त्यौहार प्रतिवर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। इसी दिन प्रभु श्री राम चौदह वर्ष के वनवास के बाद भ्राता लक्ष्मण एवं माता सीता के साथ अयोध्या लौटे थे। साथ ही दिवाली (तद्भव भाषा में) बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।

दीपावली को रोशनी का त्यौहार और दीपोत्सव भी कहा जाता है क्योकि इस दिन चारों और दीपों की रोशनी होती है। इस दिन हम सभी दीपों की पंक्ति बनाकर अंधकार को मिटाने में जुट जाते है और अमावस्या की अँधेरी रात असंख्य दीपों से जगमगाने लगाती है |

दीपावली का निबंध हिंदी में 10 लाइन

दीपावली को मनाने की भारत के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न मान्यताएं है। दीपावली का इतिहास बहुत पुराण है। हिन्दू महाकाव्य रामायण के अनुसार दीपावली का त्यौहार प्रभु श्री राम , सीता माता और लक्ष्मण के चौदह वर्ष व दो महीने के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की खुसी में मनाया जाता है।

भारत के कुछ क्षेत्रों में महाकाव्य महाभारत के अनुसार दीपावली त्यौहार को पांडवो के बारह वर्ष के वनवास और एक वर्ष के अज्ञातवर्ष के बाद लौटने की ख़ुशी में भी मनाया जाता है। ऐसा भी मन जाता है कि इस दिन देवी – देवताओं और राक्षसों द्वारा समुद्र मंथन करते समय माता लक्ष्मी का जन्म हुआ था। भारत के कुछ पूर्वी और उत्तरी क्षेत्रों में नव हिंदी वर्ष के रूप में भी इस त्यौहार को मनाया जाता है। भारत के दक्षिणी भाग में कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध की ख़ुशी में मनाया जाता है।

दीपावली पर निबंध 20 लाइन

दीपावली की तैयारियां लोग दशहरे से ही करने लग जाते है। दीपावली से पहले लोग घरों की साफ़ – सफाई करते है और लिपाई – पुताई करवाते है। दीपावली के अवसर पर लोग पहनने के लिए नए कपड़े, मोमबत्तियां , खिलौने, पटाखे, मिठाइयां , रंगोली बनाने के लिए रंग और घरों को सजाने के लिए सामान खरीदते है। इस दिन बच्चों से लेकर बूढ़ों सभी में ख़ुशी की लहर रहती है।
दीपावली का त्यौहार पांच दिनों तक चलने वाला सबसे बड़ा त्यौहार होता हैं।

पहला दिन – पहले दिन को दानतेरस कहते है। दीपावली महोत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है। इसे धन त्रयोदशी भी कहते है। धनतेरस के दिन मृत्यु के देवता यमराज , धन के देवरा कुबेर और आयुर्वेदाचार्य धन्वंतरि की पूजा का महत्त्व है। इसी दिन समुद्र मंथन में भगवान धन्वंतरि अमृत कलश के साथ प्रकट हुए थे और उनके साथ आभूषण व बहुमूल्य रत्न भी समुद्र मंथन से प्राप्त हुए थे। तभी से इस दिन का नाम ‘धनतेरस’ पड़ा और इस दिन बर्तन , धातु की सामग्री व आभूषण खरीदने की परंपरा शुरू हुई। धनतेरस के दिन व्यापारी अपने नए बहीखाते बनाते है।

Diwali par nibandh English mein यहां देखे

दूसरा दिन – दूसरे दिन को नरक चतुर्दशी, रूप चौदस और काली चौदस कहते है। इसी दिन नरकासुर का वध कर श्रीकृष्ण ने १६,१०० कन्याओं को नरकासुर के बंदीगृह से मुक्त कर उन्हें सम्मान प्रदान किया था। इस उपलक्ष में दीयों की बारात सजाई जाती है। इस दिन को लेकर मान्यता है की इस दिन सूर्योदय से पूर्व उबटन एवं स्नान करने से समस्त पाप समाप्त हो जाते है और पुण्य की प्राप्ति होती है। वहीं इस दिन से एक और मान्यता जुडी हुई है जिसके अनुसार इस दिन उबटन करने से रूप व सौंदर्य में वृद्धि होती है।

तीसरा दिन – तीसरे दिन को ‘दीपावली’ कहते है। यही मुख्य पर्व होता है। दीपावली का पर्व विशेष रूप से माँ लक्ष्मी के पूजन का पर्व होता है। कार्तिक मास की अमावस्या को ही समुद्र मंथन से माँ लक्ष्मी प्रकट हुई थी जिन्हे धन – वैभव , ऐश्वर्य और सुख समृद्धि की देवी माना जाता है।  अतः इस दिन माँ लक्ष्मी के स्वागत के लिए दीप जलाए जाते हैं ताकि अमावस्या की रात के अंधकार में दीपों से वातावरण रोशन हो जाए  |

Diwali par Nibandh in Hindi 100 words

दूसरी मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान रामचन्द्रजी माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ 14 वर्षों का वनवास समाप्त कर घर लौटे थे। श्रीराम के स्वागत हेतु अयोध्यावासियों ने घर – घर दीप जलाए थे और नगरभर को आभायुक्त कर दिया था। तभी से दीपावली के दिन दीप जलाने की परंपरा है। 5 दिवसीय इस पर्व का प्रमुख दिन लक्ष्मी पूजन अथवा दीपावली होता है।

इस दिन रात्रि को धन की देवी लक्ष्मी माता का विधिपूर्वक पूजन होता है व घर के प्रत्येक स्थान को स्वच्छ करके वहां दीपक जलाते है जिससे घर में लक्ष्मी का वास एवं दरिद्रता का नाश होता है। इस दिन असंख्य दीपों कि रंग – बिरंगी रोशनी मन को मोह लेती है। दुकानों , बाजारों एवं घरों कि सजावट दर्शनीय होती है। फुलझड़ी व् पटाखे छोड़े जाते है |

Diwali Tyohar par Nibandh

चौथा दिन – चौथे दिन अन्नकूट या गोवर्धन पूजा होती है। कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा एवं अन्नकूट उत्सव मनाया जाता है। ऐसे पड़वा या प्रतिपदा भी कहते है। खासकर इस दिन घर के पालतू बैल , गाय , बकरी आदि को अच्छे से स्नान कराकर उन्हें सजाया जाता है। फिर इस दिन घर के आँगन में गोबर से गोवर्धन बनाये जाते हैं और उनका पूजन कर पकवानों का भोग अर्पित किया जाता है।

इस दिन को लेकर मान्यता है कि त्रेतायुग में जब इंद्रदेव ने गोकुलवासियों से नाराज होकर मूसलधार बारिश शुरू कर दी थी , तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी अंगुली पर गोवर्धन पर्वत उठाकर गांववासियों को गोवर्धन कि छाँव में सुरक्षित किया । तभी से इस दिन गोवर्धन पूजन कि परंपरा भी चली आ रही है।

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पांचवा दिन – इस दिन को भाई दूज और यम द्वितीया कहते हैं। भाई दूज पांच दिवसीय दीपावली महापर्व का अंतिम दिन होता है। भाई दूज का पर्व भाई – बहन के रिश्ते को प्रगाढ़ बनाने और भाई की लम्बी उम्र के लिए मनाया जाता है। रक्षाबंधन के दिन भाई अपनी बहन को अपने घर बुलाता है जबकि भाई दूज पर बहन अपने भाई को अपने घर बुलाकर उसे तिलक कर भोजन कराती है और उसकी लम्बी उम्र की कामना कराती है ।

इस दिन को लेकर मान्यता है कि यमराज अपनी बहन यमुनाजी से मिलने के लिए उसके घर आये थे और यमुनाजी ने उन्हें प्रेमपूर्वक भोजन कराया और यह वचन लिया कि इस दिन हर साल वे अपनी बहन के घर भोजन के लिए पधारेंगे। साथ ही जो बहन इस दिन अपने भाई को आमंत्रित कर तिलक करके भोजन कराएगी , उसके भाई कि उम्र लम्बी होगी। तभी से भाई दूज पर यह परंपरा बन गयी।

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दीपावली का त्यौहार सभी के जीवन को ख़ुशी प्रदान करता है। नया जीवन जीने का उत्साह देता है। दिवाली जैसे धार्मिक महत्त्व वाले पर्व को भी कुछ असामाजिक तत्त्व अपने निरंतर प्रयास जैसे : मदिरापान , जुआ खेलना और टोना -टोटका करना आदि से ख़राब करने में जुटे रहते है जो घर व समाज के लिए बड़ी बुरी बात है। हमें इन बुराइयों से बचना चाहिए।

दीपावली अपने अंदर के अंधकार को मिटाकर समूचे वातावरण को प्रकाशमय बनाने का त्यौहार है। बच्चे अपनी इच्छानुसार बम, फुलझड़ियां तथा अन्य पटाखे खरीदते है और आतिशबाजी का आनंद उठाते है। हमें इस बात को समझना होगा कि दीपावली के त्यौहार का अर्थ दीप, प्रेम और सुख – समृद्धि से है। इसीलिए पटाखों का इस्तेमाल सावधानीपूर्वक और अपने बड़ों के सामने रहकर करना चाहिए।

दीपावली का त्यौहार हमे आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। यह त्यौहार सांस्कृतिक और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। इस त्यौहार के कारण लोगों में आज भी सामाजिक एकता बानी हुई है।

हिंदी साहित्यकार गोपालदास नीरज ने भी कहा है, “जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना , अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाये।” इसीलिए दीपोत्सव यानि दीपावली पर प्रेम और सौहाद्र को बढ़ावा देने के प्रयत्न करने चाहिए।इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि हमारे किसी भी कार्य एवं व्यवहार से किसी को भी दुःख न पहुंचे , तभी दीपावली का त्यौहार मनाना सार्थक होगा ।

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